अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
खग मृग बृंद अनंदित रहहीं। मधुप मधुर गंजत छबि लहहीं।।
मूल पाठ
खग मृग बृंद अनंदित रहहीं। मधुप मधुर गंजत छबि लहहीं।।
सो बन बरनि न सक अहिराजा। जहाँ प्रगट रघुबीर बिराजा।।
स्रोत अभिलेख 3.14 · पुस्तक पृ. 638, 639
भावार्थ
मूल पाठ के बादपक्षी और पशुओंके समूह आनन्दित रहते हैं और भौंरे मधुर गुंजार करते हुए शोभा पा रहे हैं। जहाँ प्रत्यक्ष श्रीरामजी विराजमान हैं, उस वनका वर्णन सर्पराज शेषजी भी नहीं कर सकते॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 638 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 खग मृग बृंद अनंदित रहहीं। मधुप मधुर गंजत छबि लहहीं।।
English explanation
Groups of birds and wild animals remain joyful; the bees hum sweetly and add to the scene's beauty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| मृग | वन्य पशु | wild animals |
| बृंद | समूह | groups |
| अनंदित | आनंदित | joyful |
| रहहीं | रहते हैं | remain |
| मधुप | भौंरे | bees |
| मधुर | मधुर ढंग से | sweetly |
| गंजत | गुंजार करते हुए | humming |
| छबि | शोभा | beauty |
| लहहीं | पाते हैं | attain |
2 सो बन बरनि न सक अहिराजा। जहाँ प्रगट रघुबीर बिराजा।।
English explanation
Even Shesha, king of serpents, cannot describe that forest where Rama, the hero of Raghu's lineage, is personally present.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस | that |
| बन | वन | forest |
| बरनि | वर्णन करना | describe |
| न | नहीं | not |
| सक | सकते | can |
| अहिराजा | सर्पराज शेष | Shesha, king of serpents |
| जहाँ | जहाँ | where |
| प्रगट | साक्षात् | in person |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम | Rama, hero of Raghu's lineage |
| बिराजा | विराजमान हैं | is present |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 638
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 638, 639
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।