अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब ते राम कीन्ह तहँ बासा। सुखी भए मुनि बीती त्रासा।।
मूल पाठ
जब ते राम कीन्ह तहँ बासा। सुखी भए मुनि बीती त्रासा।।
गिरि बन नदीं ताल छबि छाए। दिन दिन प्रति अति हौहिं सुहाए।।
स्रोत अभिलेख 3.14 · पुस्तक पृ. 638, 639
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे श्रीरामजीने वहाँ निवास किया तबसे मुनि सुखी हो गये, उनका डर जाता रहा। पर्वत, वन, नदी और तालाब शोभासे छा गये। वे दिनोंदिन अधिक सुहावने (मालूम) होने लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 638 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब ते राम कीन्ह तहँ बासा। सुखी भए मुनि बीती त्रासा।।
English explanation
Ever since Rama made his dwelling there, the sages became happy and their fear passed away.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| ते | से | since |
| राम | राम | Rama, the lord |
| कीन्ह | किया | made |
| तहँ | वहाँ | there |
| बासा | निवास | his dwelling |
| सुखी | सुखी | happy |
| भए | हो गए | became |
| मुनि | मुनि लोग | the sages |
| बीती | दूर हो गया | passed away |
| त्रासा | भय | fear |
2 गिरि बन नदीं ताल छबि छाए। दिन दिन प्रति अति हौहिं सुहाए।।
English explanation
The mountains, forests, rivers, and lakes became suffused with beauty and grew ever more lovely day by day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरि | पर्वत | mountains |
| बन | वन | forests |
| नदीं | नदियाँ | rivers |
| ताल | तालाब | lakes |
| छबि | सुंदरता | beauty |
| छाए | से भर गए | became suffused with |
| दिन | दिन | day |
| दिन | दिन | day |
| प्रति | प्रत्येक; प्रति | each; per |
| अति | अत्यंत | very |
| हौहिं | होते जाते हैं | keep becoming |
| सुहाए | मनोहर | lovely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 638
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 638, 639
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