अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मम गुन गावत पुलक सरीरा। गदगद गिरा नयन बह नीरा।।
मूल पाठ
मम गुन गावत पुलक सरीरा। गदगद गिरा नयन बह नीरा।।
काम आदि मद दंभ न जाकें। तात निरंतर बस मैं ताकें।।
स्रोत अभिलेख 3.16 · पुस्तक पृ. 640, 641
भावार्थ
मूल पाठ के बादमेरा गुण गाते समय जिसका शरीर पुलकित हो जाय, वाणी गद्गद हो जाय और नेत्रोंसे [प्रेमाश्रुओंका] जल बहने लगे और काम, मद और दम्भ आदि जिसमें न हों, हे भाई! मैं सदा उसके वशमें रहता हूँ॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 641 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मम गुन गावत पुलक सरीरा। गदगद गिरा नयन बह नीरा।।
English explanation
While singing my virtues, the body thrills, the voice chokes with emotion, and tears flow from the eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| गुन | गुण | virtues |
| गावत | गाते हुए | while singing |
| पुलक | रोमांचित | thrilled, with hairs standing on end |
| सरीरा | शरीर | body |
| गदगद | भाव से रुँधी हुई | choked with emotion |
| गिरा | वाणी | voice |
| नयन | आँखों से | from the eyes |
| बह | बहता है | flows |
| नीरा | जल; आँसू | water; tears |
2 काम आदि मद दंभ न जाकें। तात निरंतर बस मैं ताकें।।
English explanation
Dear one, I am always under the sway of the devotee who is free of lust and other faults, pride, and hypocrisy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | काम; वासना | lust |
| आदि | आदि विकार | and other such faults |
| मद | अहंकार | pride |
| दंभ | दंभ; ढोंग | hypocrisy; pretension |
| न | नहीं हैं | are absent |
| जाकें | जिसमें | in whom |
| तात | हे प्रिय लक्ष्मण | dear Lakshmana |
| निरंतर | सदा | always |
| बस | वश में | under the sway |
| मैं | मैं | I |
| ताकें | उसके | of that devotee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 641
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 640, 641
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