अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संत चरन पंकज अति प्रेमा। मन क्रम बचन भजन दृढ़ नेमा।।
मूल पाठ
संत चरन पंकज अति प्रेमा। मन क्रम बचन भजन दृढ़ नेमा।।
गुरु पितु मातु बंधु पति देवा। सब मोहि कहँ जाने दृढ़ सेवा।।
स्रोत अभिलेख 3.16 · पुस्तक पृ. 640, 641
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसका संतोंके चरणकमलोंमें अत्यन्त प्रेम हो; मन, वचन और कर्मसे भजनका दृढ़ नियम हो और जो मुझको ही गुरु, पिता, माता, भाई, पति और देवता सब कुछ जाने और सेवामें दृढ़ हो;॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 641 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 संत चरन पंकज अति प्रेमा। मन क्रम बचन भजन दृढ़ नेमा।।
English explanation
There is deep love for the saints' lotus feet and a firm commitment to worship through thought, action, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संत | संतों के | of saints |
| चरन | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| अति | अत्यंत | deep |
| प्रेमा | प्रेम | love |
| मन | मन से | through thought |
| क्रम | कर्म से | through action |
| बचन | वचन से | through speech |
| भजन | भजन; उपासना | devotional worship |
| दृढ़ | अटल | firm |
| नेमा | नियम; संकल्प | discipline; commitment |
2 गुरु पितु मातु बंधु पति देवा। सब मोहि कहँ जाने दृढ़ सेवा।।
English explanation
One regards me as everything—teacher, father, mother, kinsman, lord, and deity—and serves me steadfastly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुरु | गुरु | teacher |
| पितु | पिता | father |
| मातु | माता | mother |
| बंधु | बंधु; संबंधी | kinsman |
| पति | स्वामी | lord; master |
| देवा | देवता | deity |
| सब | सब | all; everything |
| मोहि | मुझे | me |
| कहँ | को | as the object of regarding |
| जाने | माने; जाने | regards; recognizes |
| दृढ़ | अटल भाव से | steadfastly |
| सेवा | सेवा करे | serves |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 641
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 640, 641
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।