अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि कर फल पुनि बिषय बिरागा। तब मम धर्म उपज अनुरागा।।
मूल पाठ
एहि कर फल पुनि बिषय बिरागा। तब मम धर्म उपज अनुरागा।।
श्रवनादिक नव भक्ति दृढ़ाहीं। मम लीला रति अति मन माहीं।।
स्रोत अभिलेख 3.16 · पुस्तक पृ. 640, 641
भावार्थ
मूल पाठ के बादइसका फल, फिर विषयोंसे वैराग्य होगा। तब (वैराग्य होनेपर) मेरे धर्म (भागवतधर्म) में प्रेम उत्पन्न होगा। तब श्रवण आदि नौ प्रकारकी भक्तियाँ दृढ़ होंगी और मनमें मेरी लीलाओंके प्रति अत्यन्त प्रेम होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 641 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि कर फल पुनि बिषय बिरागा। तब मम धर्म उपज अनुरागा।।
English explanation
The resulting fruit is detachment from sense objects; then love for the dharma centered on me arises.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस साधना | this practice |
| कर | का | of |
| फल | फल | fruit; result |
| पुनि | फिर | then |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों से | from sense objects |
| बिरागा | वैराग्य | detachment |
| तब | तब | then |
| मम | मेरे | my |
| धर्म | धर्म के प्रति | toward dharma centered on me |
| उपज | उत्पन्न होता है | arises |
| अनुरागा | प्रेम; लगाव | love; attachment |
2 श्रवनादिक नव भक्ति दृढ़ाहीं। मम लीला रति अति मन माहीं।।
English explanation
The nine forms of devotion, beginning with listening, become firm, and deep love for my divine play grows in the heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रवनादिक | श्रवण आदि | listening and the other practices |
| नव | नौ | nine |
| भक्ति | भक्ति के रूप | forms of devotion |
| दृढ़ाहीं | दृढ़ होती हैं | become firmly established |
| मम | मेरी | my |
| लीला | लीला में | in divine play |
| रति | प्रेम | love |
| अति | अत्यंत | deep |
| मन | मन | the heart |
| माहीं | में | within |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 641
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 640, 641
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।