अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भगति कि साधन कहउँ बखानी। सुगम पंथ मोहि पावहिं प्रानी।।
मूल पाठ
भगति कि साधन कहउँ बखानी। सुगम पंथ मोहि पावहिं प्रानी।।
प्रथमहिं बिप्र चरन अति प्रीती। निज निज कर्म निरत श्रुति रीती।।
स्रोत अभिलेख 3.16 · पुस्तक पृ. 640, 641
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब मैं भक्तिके साधन विस्तारसे कहता हूँ—यह सुगम मार्ग है, जिससे जीव मुझको सहज ही पा जाते हैं। पहले तो ब्राह्मणोंके चरणोंमें अत्यन्त प्रीति हो और वेदकी रीतिके अनुसार अपने- अपने [वर्णाश्रमके] कर्मोंमें लगा रहे॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 640 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भगति कि साधन कहउँ बखानी। सुगम पंथ मोहि पावहिं प्रानी।।
English explanation
I explain the means of devotion; by this accessible path, beings attain me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| कि | के | of |
| साधन | साधन; उपाय | means; practices |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| बखानी | विस्तार से समझाकर | explaining fully |
| सुगम | सरल; सुलभ | easy; accessible |
| पंथ | मार्ग से | by the path |
| मोहि | मुझे | me |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | attain |
| प्रानी | प्राणी | beings |
2 प्रथमहिं बिप्र चरन अति प्रीती। निज निज कर्म निरत श्रुति रीती।।
English explanation
First, there should be deep love for the feet of Brahmins and dedication to one's respective duties according to Vedic precepts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथमहिं | सबसे पहले | first of all |
| बिप्र | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| चरन | चरणों में | toward the feet |
| अति | अत्यंत | deep |
| प्रीती | प्रेम | love |
| निज | अपने | one's own |
| निज | अपने; प्रत्येक के अपने | respective |
| कर्म | कर्तव्य-कर्म में | in duties |
| निरत | तत्पर | devoted; engaged |
| श्रुति | वेदों की | of the Vedas |
| रीती | रीति के अनुसार | according to precepts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 640
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 640, 641
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।