अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुतंत्र अवलंब न आना। तेहि आधीन ग्यान बिग्याना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह भक्ति स्वतन्त्र है, उसको (ज्ञान-विज्ञान आदि किसी) दूसरे साधनका सहारा (अपेक्षा) नहीं है। ज्ञान और विज्ञान तो उसके अधीन हैं। हे तात! भक्ति अनुपम एवं सुखकी मूल है; और वह तभी मिलती है जब संत अनुकूल (प्रसन्न) होते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 640 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो सुतंत्र अवलंब न आना। तेहि आधीन ग्यान बिग्याना।।
भगति तात अनुपम सुखमूला। मिलइ जो संत होइँ अनुकूला।।
स्रोत अभिलेख 3.16 · पुस्तक पृ. 640, 641
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो सुतंत्र अवलंब न आना। तेहि आधीन ग्यान बिग्याना।।
English explanation
That devotion is independent and needs no other support. Knowledge and realized understanding are subordinate to it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह भक्ति | that devotion |
| सुतंत्र | स्वतंत्र | independent |
| अवलंब | सहारा | support |
| न | नहीं | not |
| आना | अन्य | other |
| तेहि | उस भक्ति के | to that devotion |
| आधीन | अधीन | subordinate |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिग्याना | अनुभूत ज्ञान | realized understanding |
2 भगति तात अनुपम सुखमूला। मिलइ जो संत होइँ अनुकूला।।
English explanation
Dear one, devotion is incomparable and the source of happiness. It is obtained when saints are favorably disposed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भगति | भक्ति | devotion |
| तात | हे प्रिय लक्ष्मण | dear Lakshmana |
| अनुपम | अतुलनीय | incomparable |
| सुखमूला | सुख का मूल | the source of happiness |
| मिलइ | प्राप्त होती है | is obtained |
| जो | यदि; जब | if; when |
| संत | संत | saints |
| होइँ | होते हैं | are |
| अनुकूला | अनुकूल; कृपालु | favorably disposed; gracious |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 640
- सहायक विषय
- पञ्चवटी-निवास और श्रीराम-लक्ष्मण-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 640, 641
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।