अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई।।
मूल पाठ
बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई।।
पति बंचक परपति रति करई। रौरव नरक कल्प सत परई।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादऔर जो स्त्री मौका न मिलनेसे या भयवश पतिव्रता बनी रहती है, जगत्में उसे अधम स्त्री जानना। पतिको धोखा देनेवाली जो स्त्री पराये पतिसे रति करती है, वह तो सौ कल्पतक रौरव नरकमें पड़ी रहती है॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 626 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिनु अवसर भय तें रह जोई। जानेहु अधम नारि जग सोई।।
English explanation
Know as the lowest kind the woman who remains restrained only for lack of opportunity or out of fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| अवसर | अवसर | opportunity |
| भय | डर | fear |
| तें | के कारण | because of |
| रह | संयम में रहती है | remains restrained |
| जोई | जो स्त्री | whichever woman |
| जानेहु | जानो | know; consider |
| अधम | सबसे निम्न | the lowest |
| नारि | स्त्री | woman |
| जग | संसार में | in the world |
| सोई | वही | that very one |
2 पति बंचक परपति रति करई। रौरव नरक कल्प सत परई।।
English explanation
A woman who deceives her husband and has sexual relations with another man falls into Raurava hell for a hundred cosmic ages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति को | her husband |
| बंचक | छलने वाली | deceiving |
| परपति | दूसरे पुरुष से | with another man |
| रति | काम-संबंध | sexual relations |
| करई | करती है | engages in |
| रौरव | रौरव नामक | called Raurava |
| नरक | नरक में | into hell |
| कल्प | कल्प; अत्यंत दीर्घ सृष्टि-काल | cosmic ages |
| सत | सौ | a hundred |
| परई | पड़ती है | falls; remains |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 626
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।