अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
छन सुख लागि जनम सत कोटि। दुख न समुझ तेहि सम को खोटी।।
मूल पाठ
छन सुख लागि जनम सत कोटि। दुख न समुझ तेहि सम को खोटी।।
बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादक्षणभरके सुखके लिये जो सौ करोड़ (असंख्य) जन्मोंके दु:खको नहीं समझती, उसके समान दुष्टा कौन होगी। जो स्त्री छल छोड़कर पातिव्रत-धर्मको ग्रहण करती है, वह बिना ही परिश्रम परम गतिको प्राप्त करती है॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 626 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 छन सुख लागि जनम सत कोटि। दुख न समुझ तेहि सम को खोटी।।
English explanation
Who is as wayward as one who, for a moment’s pleasure, disregards the suffering of a billion births?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| छन | क्षणभर | a moment |
| सुख | सुख | pleasure |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| जनम | जन्म | births |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | ten million |
| दुख | दुख | suffering |
| न | नहीं | not |
| समुझ | विचार करती | considers |
| तेहि | उसके | her |
| सम | समान | equal to |
| को | कौन | who |
| खोटी | दुष्चरित्र | wayward |
2 बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
English explanation
A woman who abandons deceit and embraces marital fidelity attains the highest spiritual state without arduous effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिनु | बिना | without |
| श्रम | कठिन श्रम | arduous effort |
| नारि | स्त्री | a woman |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| गति | आध्यात्मिक प्राप्ति | spiritual destination |
| लहई | पाती है | attains |
| पतिब्रत | पति के प्रति निष्ठा का | of fidelity to her husband |
| धर्म | धर्म | duty |
| छाड़ि | छोड़कर | abandoning |
| छल | कपट | deceit |
| गहई | अपनाती है | embraces |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 626
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।