अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पति प्रतिकुल जनम जहँ जाई। बिधवा होई पाई तरुनाई।।
मूल पाठ
पति प्रतिकुल जनम जहँ जाई। बिधवा होई पाई तरुनाई।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादकिन्तु जो पतिके प्रतिकूल चलती है, वह जहाँ भी जाकर जन्म लेती है, वहीं जवानी पाकर (भरी जवानीमें) विधवा हो जाती है॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 626 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पति प्रतिकुल जनम जहँ जाई। बिधवा होई पाई तरुनाई।।
English explanation
A woman hostile to her husband, wherever she is born, becomes a widow upon reaching youth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पति | पति के | to her husband |
| प्रतिकुल | विरुद्ध रहने वाली | hostile |
| जनम | जन्म लेने | to be born |
| जहँ | जहाँ | wherever |
| जाई | जाती है | goes |
| बिधवा | विधवा | a widow |
| होई | हो जाती है | becomes |
| पाई | प्राप्त करके | upon attaining |
| तरुनाई | युवावस्था | youth |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 626
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।