अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बास करहु तहँ रघुकुल राया। कीजे सकल मुनिन्ह पर दाया।।
मूल पाठ
बास करहु तहँ रघुकुल राया। कीजे सकल मुनिन्ह पर दाया।।
चले राम मुनि आयसु पाई। तुरतहिं पंचबटी निअराई।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुकुलके स्वामी! आप सब मुनियोंपर दया करके वहीं निवास कीजिये। मुनिकी आज्ञा पाकर श्रीरामचन्द्रजी वहाँसे चल दिये और शीघ्र ही पञ्चवटीके निकट पहुँच गये॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 638 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बास करहु तहँ रघुकुल राया। कीजे सकल मुनिन्ह पर दाया।।
English explanation
O king of Raghu’s lineage, dwell there and show compassion to all the sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बास | निवास | residence |
| करहु | कीजिए | please make |
| तहँ | वहाँ | there |
| रघुकुल | रघु के वंश के | of Raghu’s lineage |
| राया | हे राजा | O king |
| कीजे | कीजिए | please show |
| सकल | सभी | all |
| मुनिन्ह | मुनियों | sages |
| पर | पर | toward |
| दाया | दया | compassion |
2 चले राम मुनि आयसु पाई। तुरतहिं पंचबटी निअराई।।
English explanation
Receiving the sage’s permission, Rama departed and soon drew near Panchavati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चले | चल पड़े | departed |
| राम | श्रीराम | Rama |
| मुनि | मुनि की | the sage’s |
| आयसु | आज्ञा | permission; instruction |
| पाई | पाकर | having received |
| तुरतहिं | तुरंत ही; शीघ्र ही | very soon |
| पंचबटी | पंचवटी के | Panchavati |
| निअराई | निकट पहुँच गए | drew near |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 638
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।