अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ।।
मूल पाठ
है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ।।
दंडक बन पुनीत प्रभु करहू। उग्र साप मुनिबर कर हरहू।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! एक परम मनोहर और पवित्र स्थान है; उसका नाम पञ्चवटी है। हे प्रभो! आप दण्डकवनको [जहाँ पञ्चवटी है] पवित्र कीजिये और श्रेष्ठ मुनि गौतमजीके कठोर शापको हर लीजिये॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 638 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 है प्रभु परम मनोहर ठाऊँ। पावन पंचबटी तेहि नाऊँ।।
English explanation
Lord, there is a most lovely and sacred place named Panchavati.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| है | है | there is |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| परम | अत्यंत | most; exceedingly |
| मनोहर | सुंदर; मन को भाने वाला | lovely; enchanting |
| ठाऊँ | स्थान | place |
| पावन | पवित्र | sacred |
| पंचबटी | पंचवटी नामक स्थान | Panchavati, the forest site |
| तेहि | उसका | its |
| नाऊँ | नाम | name |
2 दंडक बन पुनीत प्रभु करहू। उग्र साप मुनिबर कर हरहू।।
English explanation
Lord, sanctify the Dandaka forest and remove the great sage’s severe curse.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दंडक | दंडक नामक | Dandaka |
| बन | वन | forest |
| पुनीत | पवित्र | holy |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| करहू | कीजिए | please make |
| उग्र | कठोर; प्रचंड | severe; fierce |
| साप | शाप | curse |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | the great sage |
| कर | का | of |
| हरहू | दूर कीजिए | please remove |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 638
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।