अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि फिरि राम निकट सो आई। प्रभु लछिमन पहिं बहुरि पठाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवह लौटकर फिर श्रीरामजीके पास आयी। प्रभुने फिर उसे लक्ष्मणजीके पास भेज दिया। लक्ष्मणजीने कहा—तुम्हें वही बरेगा जो लज्जाको तृण तोड़कर (अर्थात् प्रतिज्ञा करके) त्याग देगा (अर्थात् जो निपट निर्लज्ज होगा)॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 643 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुनि फिरि राम निकट सो आई। प्रभु लछिमन पहिं बहुरि पठाई।।
लछिमन कहा तोहि सो बरई। जो तृन तोरि लाज परिहरई।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पुनि फिरि राम निकट सो आई। प्रभु लछिमन पहिं बहुरि पठाई।।
English explanation
She returned to Rama, and the Lord sent her back to Lakshmana again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | again |
| फिरि | लौटकर | returning |
| राम | राम के | Rama |
| निकट | पास | near; to |
| सो | वह | she |
| आई | आई | came |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| लछिमन | लक्ष्मण के | Lakshmana |
| पहिं | पास | to |
| बहुरि | फिर | again |
| पठाई | भेज दिया | sent her |
2 लछिमन कहा तोहि सो बरई। जो तृन तोरि लाज परिहरई।।
English explanation
Lakshmana said, ‘Only someone who casts off shame as easily as snapping a blade of grass will marry you.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| कहा | कहा | said |
| तोहि | तुम्हें | you |
| सो | वही | that person alone |
| बरई | वरेगा, विवाह करेगा | will choose in marriage |
| जो | जो | who |
| तृन | तिनका | a blade of grass |
| तोरि | तोड़कर | breaking |
| लाज | लज्जा | shame; modesty |
| परिहरई | त्याग दे | casts aside |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 643
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।