अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब खिसिआनि राम पहिं गई। रूप भयंकर प्रगटत भई।।
मूल पाठ
तब खिसिआनि राम पहिं गई। रूप भयंकर प्रगटत भई।।
सीतहि सभय देखि रघुराई। कहा अनुज सन सयन बुझाई।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब वह खिसियायी हुई (क्रुद्ध होकर) श्रीरामजीके पास गयी और उसने अपना भयङ्कर रूप प्रकट किया। सीताजीको भयभीत देखकर श्रीरघुनाथजीने लक्ष्मणजीको इशारा देकर कहा॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 643 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब खिसिआनि राम पहिं गई। रूप भयंकर प्रगटत भई।।
English explanation
Then, angry with humiliation, she went to Rama and began revealing her terrifying form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| खिसिआनि | खिसियाई, अपमान से चिढ़ी हुई | irritated and humiliated |
| राम | राम के | Rama |
| पहिं | पास | to |
| गई | गई | went |
| रूप | रूप | form |
| भयंकर | डरावना | terrifying |
| प्रगटत | प्रकट करती | revealing |
| भई | होने लगी | began |
2 सीतहि सभय देखि रघुराई। कहा अनुज सन सयन बुझाई।।
English explanation
Seeing Sita frightened, Rama spoke to his younger brother and conveyed his intent by a gesture.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीतहि | सीता को | Sita |
| सभय | भयभीत | frightened |
| देखि | देखकर | seeing |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s line |
| कहा | कहा | spoke |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| सन | से | to |
| सयन | संकेत से | by a gesture |
| बुझाई | समझाकर | making understood |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 643
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।