अरण्यकाण्ड · दोहा 17 · दोहा/सोरठा
लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्हि।
मूल पाठ
लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्हि।
ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्हि।।17।।
स्रोत अभिलेख 3.17 · पुस्तक पृ. 641, 643
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजीने बड़ी फुर्तीसे उसको बिना नाक-कानकी कर दिया। मानो उसके हाथ रावणको चुनौती दी हो!॥ १७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 643 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1लछिमन अति लाघवँ सो नाक कान बिनु कीन्हि।
English explanation
With great swiftness, Lakshmana deprived her of her nose and ears.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| अति | बहुत | great |
| लाघवँ | फुर्ती और दक्षता से | with swiftness and dexterity |
| सो | उसे, शूर्पणखा को | her, Shurpanakha |
| नाक | नाक | nose |
| कान | कान | ears |
| बिनु | के बिना | without |
| कीन्हि | कर दिया | made; rendered |
2 ताके कर रावन कहँ मनौ चुनौती दीन्हि।।17।।
English explanation
It was as though he had sent Ravana a challenge through her.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताके | उसके | her |
| कर | हाथ, उसके माध्यम से | by her hand; through her |
| रावन | रावण को | Ravana |
| कहँ | को | to |
| मनौ | मानो | as though |
| चुनौती | चुनौती | a challenge |
| दीन्हि | दे दी | had given |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 17
- स्रोत अभिलेख
- 3.17
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 643
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 641, 643
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।