अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाक कान बिनु भइ बिकरारा। जनु स्त्रव सैल गैरु कै धारा।।
मूल पाठ
नाक कान बिनु भइ बिकरारा। जनु स्त्रव सैल गैरु कै धारा।।
खर दूषन पहिं गइ बिलपाता। धिग धिग तव पौरुष बल भ्राता।।
स्रोत अभिलेख 3.18 · पुस्तक पृ. 643, 644
भावार्थ
मूल पाठ के बादबिना नाक-कानके वह विकराल हो गयी। [उसके शरीरसे रक्त इस प्रकार बहने लगा] मानो [काले] पर्वतसे गेरूकी धारा बह रही हो। वह विलाप करती हुई खर-दूषणके पास गयी। [और बोली—] हे भाई! तुम्हारे पौरुष (वीरता) को धिक्कार है, तुम्हारे बलको धिक्कार है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 643 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नाक कान बिनु भइ बिकरारा। जनु स्त्रव सैल गैरु कै धारा।।
English explanation
Without her nose and ears, Shurpanakha became ghastly, as though a stream of red ochre were flowing from a mountain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाक | नाक | nose |
| कान | कान | ears |
| बिनु | बिना | without |
| भइ | हो गई | became |
| बिकरारा | विकराल | ghastly |
| जनु | मानो | as though |
| स्त्रव | बह रही हो | were flowing |
| सैल | पर्वत से | from a mountain |
| गैरु | गेरू | red ochre |
| कै | की | of |
| धारा | धारा | stream |
2 खर दूषन पहिं गइ बिलपाता। धिग धिग तव पौरुष बल भ्राता।।
English explanation
She went lamenting to Khara and Dushana, saying, ‘Brother, shame, shame on your valor and strength!’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खर | खर नामक राक्षस | Khara, a demon |
| दूषन | दूषण नामक राक्षस | Dushana, a demon |
| पहिं | के पास | to |
| गइ | गई | went |
| बिलपाता | विलाप करती हुई | lamenting |
| धिग | धिक्कार | shame |
| धिग | धिक्कार | shame |
| तव | तुम्हारे | your |
| पौरुष | पराक्रम | valor |
| बल | बल | strength |
| भ्राता | हे भाई | O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 643
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 643, 644
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।