अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं।।
मूल पाठ
नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं।।
प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।।
स्रोत अभिलेख 3.35 · पुस्तक पृ. 666, 667
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैं तुझसे अब अपनी नवधा भक्ति कहता हूँ। तू सावधान होकर सुन और मनमें धारण कर। पहली भक्ति है संतोंका सत्संग। दूसरी भक्ति है मेरे कथा-प्रसंगमें प्रेम॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 667 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नवधा भगति कहउँ तोहि पाहीं। सावधान सुनु धरु मन माहीं।।
English explanation
I tell you the nine forms of devotion. Listen attentively and hold them in your mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नवधा | नौ प्रकार की | ninefold |
| भगति | भक्ति | devotion |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I tell |
| तोहि | तुम्हें | you |
| पाहीं | तुम्हारे पास, तुम्हें | to you |
| सावधान | ध्यानपूर्वक | attentively |
| सुनु | सुनो | listen |
| धरु | धारण करो | retain |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | within |
2 प्रथम भगति संतन्ह कर संगा। दूसरि रति मम कथा प्रसंगा।।
English explanation
The first form of devotion is companionship with saints. The second is love for accounts of my deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रथम | पहली | first |
| भगति | भक्ति | form of devotion |
| संतन्ह | संतों | saints |
| कर | का | with |
| संगा | संग | companionship |
| दूसरि | दूसरी | second |
| रति | प्रेम | love |
| मम | मेरी | my |
| कथा | कथा | stories of my deeds |
| प्रसंगा | प्रसंगों में | in their accounts |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 667
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 666, 667
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।