अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
देखि राम छबि नयन जुड़ाने। सादर निज आश्रम तब आने।।
मूल पाठ
देखि राम छबि नयन जुड़ाने। सादर निज आश्रम तब आने।।
करि पूजा कहि बचन सुहाए। दिए मूल फल प्रभु मन भाए।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 622, 623
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीकी छबि देखकर मुनिके नेत्र शीतल हो गये। तब वे उनको आदरपूर्वक अपने आश्रममें ले आये। पूजन करके सुन्दर वचन कहकर मुनिने मूल और फल दिये, जो प्रभुके मनको बहुत रुचे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 622 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 देखि राम छबि नयन जुड़ाने। सादर निज आश्रम तब आने।।
English explanation
Seeing Rama’s beauty, the sage’s eyes were soothed and satisfied. He then respectfully brought them into his hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | having seen |
| राम | राम की | Rama’s |
| छबि | शोभा; सुंदरता | beauty; splendor |
| नयन | नेत्र | eyes |
| जुड़ाने | शीतल और तृप्त हुए | were soothed and satisfied |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| निज | अपने | his own |
| आश्रम | आश्रम में | into the hermitage |
| तब | तब; फिर | then |
| आने | ले आए | brought |
2 करि पूजा कहि बचन सुहाए। दिए मूल फल प्रभु मन भाए।।
English explanation
After offering worship and speaking pleasing words, the sage gave roots and fruits, which pleased Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having performed |
| पूजा | पूजा; आदरपूर्ण अर्चना | worship; reverent homage |
| कहि | कहकर | having spoken |
| बचन | वचन; बातें | words |
| सुहाए | मधुर; मनभावन | pleasant; pleasing |
| दिए | दिए | gave |
| मूल | खाने योग्य जड़ें; कंद-मूल | edible roots |
| फल | फल | fruits |
| प्रभु | प्रभु राम के | Lord Rama’s |
| मन | मन को | heart; mind |
| भाए | अच्छे लगे | pleased |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 622
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 622, 623
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।