अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुलकित गात अत्रि उठि धाए। देखि रामु आतुर चलि आए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दशरीर पुलकित हो गया, अत्रिजी उठकर दौड़े। उन्हें दौड़े आते देखकर श्रीरामजी और भी शीघ्रतासे चले आये। दण्डवत् करते हुए ही श्रीरामजीको [उठाकर] मुनिने हृदयसे लगा लिया और प्रेमाश्रुओंके जलसे दोनों जनोंको (दोनों भाइयोंको) नहला दिया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 622 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पुलकित गात अत्रि उठि धाए। देखि रामु आतुर चलि आए।।
करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 622, 623
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पुलकित गात अत्रि उठि धाए। देखि रामु आतुर चलि आए।।
English explanation
His body thrilled with joy, Atri rose and hurried forward. Seeing him, Rama too eagerly came forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुलकित | रोमांचित | thrilled, with hairs standing on end |
| गात | शरीर | body |
| अत्रि | ऋषि अत्रि | the sage Atri |
| उठि | उठकर | having risen |
| धाए | दौड़े | hurried; ran forward |
| देखि | देखकर | seeing him |
| रामु | राम | Rama |
| आतुर | उत्सुक; व्यग्र | eager |
| चलि | चलकर; आगे बढ़कर | moving forward |
| आए | आए | came |
2 करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
English explanation
As Rama bowed in full prostration, the sage embraced him and bathed both brothers in tears of love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते समय | while performing |
| दंडवत | भूमि पर लेटकर प्रणाम | full prostration |
| मुनि | मुनि अत्रि ने | the sage Atri |
| उर | हृदय से; छाती से | to his heart; to his chest |
| लाए | लगा लिया | drew into an embrace |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| बारि | जल; यहाँ आँसू | water; here, tears |
| द्वौ | दोनों | both |
| जन | व्यक्तियों; दोनों भाइयों को | persons; the two brothers |
| अन्हवाए | नहलाया | bathed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 622
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 622, 623
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।