अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा। को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा।।
मूल पाठ
दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा। को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा।।
कबहुँक फिरि पाछें पुनि जाई। कबहुँक नृत्य करइ गुन गाई।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हें दिशा-विदिशा (दिशाएँ और उनके कोण आदि) और रास्ता, कुछ भी नहीं सूझ रहा है। मैं कौन हूँ और कहाँ जा रहा हूँ, यह भी नहीं जानते (इसका भी ज्ञान नहीं है)। वे कभी पीछे घूमकर फिर आगे चलने लगते हैं और कभी [प्रभुके] गुण गा-गाकर नाचने लगते हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 631 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दिसि अरु बिदिसि पंथ नहिं सूझा। को मैं चलेउँ कहाँ नहिं बूझा।।
English explanation
He could discern no path in any direction; he no longer knew who he was or where he was going.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिसि | मुख्य दिशाएँ | cardinal directions |
| अरु | और | and |
| बिदिसि | बीच की दिशाएँ | intermediate directions |
| पंथ | रास्ता | path |
| नहिं | नहीं | not |
| सूझा | दिखाई दिया | was discernible |
| को | कौन | who |
| मैं | मैं | I |
| चलेउँ | चला हूँ | have set out |
| कहाँ | कहाँ | where |
| नहिं | नहीं | not |
| बूझा | समझा | understood |
2 कबहुँक फिरि पाछें पुनि जाई। कबहुँक नृत्य करइ गुन गाई।।
English explanation
Sometimes he turned and went back; sometimes he danced while singing the Lord’s virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कबहुँक | कभी | sometimes |
| फिरि | मुड़कर | turning |
| पाछें | पीछे | backward |
| पुनि | फिर | again |
| जाई | जाते हैं | goes |
| कबहुँक | कभी | sometimes |
| नृत्य | नृत्य | dance |
| करइ | करते हैं | performs |
| गुन | प्रभु के गुण | the Lord’s virtues |
| गाई | गाकर | singing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 631
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।