अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखैं तरु ओट लुकाई।।
मूल पाठ
अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखैं तरु ओट लुकाई।।
अतिसय प्रीति देखि रघुबीरा। प्रगटे हृदयँ हरन भव भीरा।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनिने प्रगाढ़ प्रेमाभक्ति प्राप्त कर ली। प्रभु श्रीरामजी वृक्षकी आड़में छिपकर [भक्तकी प्रेमोन्मत्त दशा] देख रहे हैं। मुनिका अत्यन्त प्रेम देखकर भवभय (आवागमनके भय) को हरनेवाले श्रीरघुनाथजी मुनिके हृदयमें प्रकट हो गये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 632 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अबिरल प्रेम भगति मुनि पाई। प्रभु देखैं तरु ओट लुकाई।।
English explanation
The sage attained unbroken loving devotion; the Lord watched him while hidden behind a tree.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबिरल | अविच्छिन्न | unbroken |
| प्रेम | प्रेममयी | loving |
| भगति | भक्ति | devotion |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| पाई | प्राप्त की | attained |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| देखैं | देखते हैं | watches |
| तरु | वृक्ष की | of a tree |
| ओट | आड़ में | behind the cover |
| लुकाई | छिपकर | hiding |
2 अतिसय प्रीति देखि रघुबीरा। प्रगटे हृदयँ हरन भव भीरा।।
English explanation
Seeing his immense love, Rama, hero of Raghu’s line and remover of worldly fear, appeared in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतिसय | अत्यधिक | immense |
| प्रीति | प्रेम | love |
| देखि | देखकर | seeing |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of Raghu’s line |
| प्रगटे | प्रकट हुए | appeared |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| हरन | हरने वाले | remover of |
| भव | संसार का | worldly |
| भीरा | भय | fear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 632
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।