अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होइहैं सुफल आजु मम लोचन। देखि बदन पंकज भव मोचन।।
मूल पाठ
होइहैं सुफल आजु मम लोचन। देखि बदन पंकज भव मोचन।।
निर्भर प्रेम मगन मुनि ग्यानी। कहि न जाइ सो दसा भवानी।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[भगवान्की इस बानका स्मरण आते ही मुनि आनन्दमग्र होकर मन-ही-मन कहने लगे—] अहा! भवबन्धनसे छुड़ानेवाले प्रभुके मुखारविन्दको देखकर आज मेरे नेत्र सफल होंगे। [शिवजी कहते हैं—] हे भवानी! ज्ञानी मुनि प्रेममें पूर्णरूपसे निमग्र हैं। उनकी वह दशा कही नहीं जाती॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 631 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 होइहैं सुफल आजु मम लोचन। देखि बदन पंकज भव मोचन।।
English explanation
Today my eyes will find fulfillment in seeing the lotus face of the Lord who frees one from worldly bondage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहैं | होंगे | will become |
| सुफल | सफल | fulfilled |
| आजु | आज | today |
| मम | मेरे | my |
| लोचन | नेत्र | eyes |
| देखि | देखकर | by seeing |
| बदन | मुख | face |
| पंकज | कमल जैसा | lotus-like |
| भव | संसार-बंधन | worldly bondage |
| मोचन | छुड़ाने वाले | the liberator from |
2 निर्भर प्रेम मगन मुनि ग्यानी। कहि न जाइ सो दसा भवानी।।
English explanation
The wise sage was immersed in profound love; O Bhavani, that state cannot be described.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निर्भर | प्रगाढ़ | profound |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | डूबे हुए | immersed |
| मुनि | मुनि | sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| कहि | कहा | described |
| न | नहीं | not |
| जाइ | जा सकता | can be |
| सो | वह | that |
| दसा | दशा | state |
| भवानी | हे पार्वती | O Parvati |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 631
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।