अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नहिं सतसंग जोग जप जागा। नहिं दृढ़ चरन कमल अनुरागा।।
मूल पाठ
नहिं सतसंग जोग जप जागा। नहिं दृढ़ चरन कमल अनुरागा।।
एक बानि करुनानिधान की। सो प्रिय जाकें गति न आन की।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 631, 633
भावार्थ
मूल पाठ के बादमैंने न तो सत्सङ्ग, योग, जप अथवा यज्ञ ही किये हैं और न प्रभुके चरणकमलोंमें मेरा दृढ़ अनुराग ही है। हाँ, दयाके भण्डार प्रभुकी एक बान है कि जिसे किसी दूसरेका सहारा नहीं है, वह उन्हें प्रिय होता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 631 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नहिं सतसंग जोग जप जागा। नहिं दृढ़ चरन कमल अनुरागा।।
English explanation
I have neither holy company, yoga, repetition of sacred names, nor sacrifice, nor firm love for the Lord’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | no |
| सतसंग | संतों का संग | holy company |
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| जप | नाम या मंत्र का जप | repetition of a name or mantra |
| जागा | यज्ञ | sacrifice |
| नहिं | नहीं | no |
| दृढ़ | दृढ़ | steadfast |
| चरन | चरण | feet |
| कमल | कमल जैसे | lotus-like |
| अनुरागा | प्रेम | love |
2 एक बानि करुनानिधान की। सो प्रिय जाकें गति न आन की।।
English explanation
The Lord, treasure of compassion, has this disposition: he loves the one who has no other refuge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बानि | स्वभाव | disposition |
| करुनानिधान | करुणा के भंडार प्रभु | the Lord, treasure of compassion |
| की | का | of |
| सो | वह व्यक्ति | that person |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| जाकें | जिसके लिए | for whom |
| गति | आश्रय | refuge |
| न | नहीं | no |
| आन | दूसरे | another |
| की | का | in |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 631
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 631, 633
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।