अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
मूल पाठ
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
पुनि आए जहँ मुनि सरभंगा। सुंदर अनुज जानकी संगा।।
स्रोत अभिलेख 3.7 · पुस्तक पृ. 628, 629
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[श्रीरामजीके हाथसे मरते ही] उसने तुरंत सुन्दर (दिव्य) रूप प्राप्त कर लिया। दुखी देखकर प्रभुने उसे अपने परम धामको भेज दिया। फिर वे सुन्दर छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजीके साथ वहाँ आये जहाँ मुनि शरभंगजी थे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 629 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
English explanation
Viradha immediately attained a beautiful form. Seeing his suffering, Rama sent him to his own abode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरतहिं | तुरंत ही | immediately |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| रूप | रूप | form |
| तेहिं | उसने, विराध ने | he, Viradha |
| पावा | प्राप्त किया | attained |
| देखि | देखकर | seeing |
| दुखी | दुःखी | suffering |
| निज | अपने | his own |
| धाम | धाम | abode |
| पठावा | भेज दिया | sent him |
2 पुनि आए जहँ मुनि सरभंगा। सुंदर अनुज जानकी संगा।।
English explanation
Then Rama came with his handsome younger brother Lakshmana and Sita to where the sage Sharabhanga was.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| आए | आए | came |
| जहँ | जहाँ | where |
| मुनि | ऋषि | the sage |
| सरभंगा | शरभंग ऋषि | Sharabhanga, the sage |
| सुंदर | सुंदर | handsome |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| संगा | साथ | with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 629
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 628, 629
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।