अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ जहँ जाहि देव रघुराया। करहिं मेध तहँ तहँ नभ छाया।।
मूल पाठ
जहँ जहँ जाहि देव रघुराया। करहिं मेध तहँ तहँ नभ छाया।।
मिला असुर बिराध मग जाता। आवतहीं रघुवीर निपाता।।
स्रोत अभिलेख 3.7 · पुस्तक पृ. 628, 629
भावार्थ
मूल पाठ के बादजहाँ-जहाँ देव श्रीरघुनाथजी जाते हैं, वहाँ-वहाँ बादल आकाशमें छाया करते जाते हैं। रास्तेमें जाते हुए विराध राक्षस मिला। सामने आते ही श्रीरघुनाथजीने उसे मार डाला॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 628 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जहँ जहँ जाहि देव रघुराया। करहिं मेध तहँ तहँ नभ छाया।।
English explanation
Wherever Lord Rama goes, clouds overhead provide shade.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | where |
| जहँ | जहाँ भी | wherever |
| जाहि | जाते हैं | goes |
| देव | भगवान | Lord |
| रघुराया | रघुकुल के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| करहिं | करते हैं | provide |
| मेध | बादल | clouds |
| तहँ | वहाँ | there |
| तहँ | वहाँ भी | at every such place |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| छाया | छाया | shade |
2 मिला असुर बिराध मग जाता। आवतहीं रघुवीर निपाता।।
English explanation
While traveling along the path, they encountered the demon Viradha; as soon as he approached, Rama struck him down.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मिला | मिला | was encountered |
| असुर | राक्षस | the demon |
| बिराध | विराध नाम का राक्षस | Viradha, the demon |
| मग | रास्ते में | on the path |
| जाता | जाते हुए | while traveling |
| आवतहीं | आते ही | as soon as he approached |
| रघुवीर | रघुकुल के वीर राम ने | Rama, hero of Raghu’s line |
| निपाता | मार गिराया | struck him down |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 628
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 628, 629
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।