अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
उमय बीच श्री सोहइ कैसी। ब्रह्म जीव बिच माया जैसी।।
मूल पाठ
उमय बीच श्री सोहइ कैसी। ब्रह्म जीव बिच माया जैसी।।
सरिता बन गिरि अवघट घाटा। पति पहिचानी देहिं बर बाटा।।
स्रोत अभिलेख 3.7 · पुस्तक पृ. 628, 629
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनोंके बीचमें श्रीजानकीजी कैसी सुशोभित हैं, जैसे ब्रह्म और जीवके बीच माया हो। नदी, वन, पर्वत और दुर्गम घाटियाँ, सभी अपने स्वामीको पहचानकर सुन्दर रास्ता दे देते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 628 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 उमय बीच श्री सोहइ कैसी। ब्रह्म जीव बिच माया जैसी।।
English explanation
Between the two, Sita shone like Maya between Brahman and the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमय | दोनों के | of the two |
| बीच | बीच | between |
| श्री | श्री सीता | Sita, the auspicious lady |
| सोहइ | शोभित होती हैं | shines |
| कैसी | कैसी—ऐसी | how—thus |
| ब्रह्म | ब्रह्म, परम सत्य | Brahman, the ultimate reality |
| जीव | जीवात्मा | the individual soul |
| बिच | बीच | between |
| माया | माया | Maya, the power of appearance |
| जैसी | जैसे | like |
2 सरिता बन गिरि अवघट घाटा। पति पहिचानी देहिं बर बाटा।।
English explanation
Rivers, forests, mountains, and difficult passes recognize their lord and provide him a good path.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| बन | वन | forests |
| गिरि | पर्वत | mountains |
| अवघट | दुर्गम | difficult to traverse |
| घाटा | घाट और मार्ग | passes and crossings |
| पति | अपने स्वामी राम को | their lord Rama |
| पहिचानी | पहचानकर | recognizing |
| देहिं | देते हैं | provide |
| बर | उत्तम | good |
| बाटा | रास्ता | a path |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.7
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 628
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 628, 629
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।