अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि नीक लागै रघुराई। सो मोहि देहु दास सुखदाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[अत:] हे रघुनाथजी! हे दासोंको सुख देनेवाले! आपको जो अच्छा लगे, मुझे वही दीजिये। [श्रीरामचन्द्रजीने कहा—हे मुने!] तुम प्रगाढ़ भक्ति, वैराग्य, विज्ञान और समस्त गुणों तथा ज्ञानके निधान हो जाओ॥ १३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 635 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्हहि नीक लागै रघुराई। सो मोहि देहु दास सुखदाई।।
अबिरल भगति बिरति बिग्याना। होहु सकल गुन ग्यान निधाना।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्हहि नीक लागै रघुराई। सो मोहि देहु दास सुखदाई।।
English explanation
O Rama, king of Raghu’s line and giver of happiness to servants, grant me whatever seems good to you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आपको | to you |
| नीक | अच्छा | good |
| लागै | लगे | seems |
| रघुराई | हे रघुकुल के राजा राम | O Rama, king of Raghu’s line |
| सो | वही | that |
| मोहि | मुझे | to me |
| देहु | दीजिए | give |
| दास | सेवकों को | to servants |
| सुखदाई | सुख देने वाले | giver of happiness |
2 अबिरल भगति बिरति बिग्याना। होहु सकल गुन ग्यान निधाना।।
English explanation
Rama said, “May you have unbroken devotion, detachment, and realized understanding; become a treasury of all virtues and knowledge.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबिरल | अविच्छिन्न | unbroken |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| बिग्याना | अनुभूत ज्ञान | realized understanding |
| होहु | तुम बनो | may you become |
| सकल | समस्त | all |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| ग्यान | ज्ञान के | of knowledge |
| निधाना | भंडार | a treasury |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 635
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।