अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोग जग्य जप तप ब्रत कीन्हा। प्रभु कहँ देइ भगति बर लीन्हा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयोग, यज्ञ, जप, तप जो कुछ व्रत आदि भी मुनिने किया था, सब प्रभुको समर्पण करके बदलेमें भक्तिका वरदान ले लिया। इस प्रकार [दुर्लभ भक्ति प्राप्त करके फिर] चिता रचकर मुनि शरभंगजी हृदयसे सब आसक्ति छोड़कर उसपर जा बैठे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 629 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोग जग्य जप तप ब्रत कीन्हा। प्रभु कहँ देइ भगति बर लीन्हा।।
एहि बिधि सर रचि मुनि सरभंगा। बैठे हृदयँ छाड़ि सब संगा।।
स्रोत अभिलेख 3.8 · पुस्तक पृ. 629, 630
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जोग जग्य जप तप ब्रत कीन्हा। प्रभु कहँ देइ भगति बर लीन्हा।।
English explanation
Offering to the Lord the yoga, sacrifices, recitation, austerities, and vows he had performed, the sage received the boon of devotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोग | योग-साधना | yogic practice |
| जग्य | यज्ञ | sacrificial rites |
| जप | मंत्र या नाम का जप | repetition of a mantra or divine name |
| तप | तपस्या | austerities |
| ब्रत | व्रत | religious vows |
| कीन्हा | किए हुए | performed |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कहँ | को | to |
| देइ | अर्पित करके | having offered |
| भगति | भक्ति का | of devotion |
| बर | वरदान | boon |
| लीन्हा | प्राप्त किया | received |
2 एहि बिधि सर रचि मुनि सरभंगा। बैठे हृदयँ छाड़ि सब संगा।।
English explanation
In this way, having prepared a funeral pyre, the sage Sharabhanga sat down, relinquishing all attachments in his heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| सर | चिता | funeral pyre |
| रचि | बनाकर | having prepared |
| मुनि | मुनि | the sage |
| सरभंगा | शरभंग | Sharabhanga, the sage |
| बैठे | बैठ गए | sat down |
| हृदयँ | हृदय में से | from the heart |
| छाड़ि | छोड़कर | having relinquished |
| सब | सभी | all |
| संगा | आसक्तियाँ | attachments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 629
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 629, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।