अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो कछु देव न मोहि निहोरा। निज पन राखेउ जन मन चोरा।।
मूल पाठ
सो कछु देव न मोहि निहोरा। निज पन राखेउ जन मन चोरा।।
तब लगि रहहु दीन हित लागी। जब लगि मिलौं तुम्हहि तनु त्यागी।।
स्रोत अभिलेख 3.8 · पुस्तक पृ. 629, 630
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे देव! यह कुछ मुझपर आपका एहसान नहीं है। हे भक्त-मनचोर! ऐसा करके आपने अपने प्रणकी ही रक्षा की है। अब इस दीनके कल्याणके लिये तबतक यहाँ ठहरिये, जबतक मैं शरीर छोड़कर आपसे [आपके धाममें न] मिलूँ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 629 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो कछु देव न मोहि निहोरा। निज पन राखेउ जन मन चोरा।।
English explanation
O Lord, that is no special favor to me; O stealer of your devotees’ hearts, you have kept your own pledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह कृपा | that act of grace |
| कछु | कोई | any |
| देव | हे देव | O Lord |
| न | नहीं | not |
| मोहि | मुझ पर | to me |
| निहोरा | एहसान | favor |
| निज | अपना | your own |
| पन | प्रण | pledge |
| राखेउ | निभाया | have kept |
| जन | भक्तों के | of devotees |
| मन | मन | hearts |
| चोरा | हे हरनेवाले | O stealer |
2 तब लगि रहहु दीन हित लागी। जब लगि मिलौं तुम्हहि तनु त्यागी।।
English explanation
For this helpless one’s sake, remain here until I leave my body and unite with you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | that time |
| लगि | तक | until |
| रहहु | रहिए | remain |
| दीन | इस दीन जन के | of this helpless one |
| हित | कल्याण के | welfare |
| लागी | लिए | for the sake of |
| जब | जब | when |
| लगि | तक | until |
| मिलौं | मैं मिलूँ | I unite |
| तुम्हहि | आपसे | with you |
| तनु | शरीर | the body |
| त्यागी | त्यागकर | having left behind |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 629
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका आगे प्रस्थान, विराध-वध और शरभङ्ग-प्रसङ्ग
- मुद्रित पृष्ठ
- 629, 630
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।