अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा। हरषे सब बिलोकि सुखकंदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवहाँ जहाँतक (जितने भी) अन्य मुनिगण थे, सभी आनन्दकन्द श्रीरामजीके दर्शन करके हॢषत हो गये॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 636 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा। हरषे सब बिलोकि सुखकंदा।।
स्रोत अभिलेख 3.12 · पुस्तक पृ. 635, 636
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जहँ लगि रहे अपर मुनि बृंदा। हरषे सब बिलोकि सुखकंदा।।
English explanation
All the other sages present there rejoiced on seeing Rama, the source of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ / वहाँ जितने | where / all who there |
| लगि | तक | to the extent |
| रहे | उपस्थित थे | were present |
| अपर | अन्य | other |
| मुनि | मुनियों के | of sages |
| बृंदा | समूह | groups |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| सब | सब | all |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| सुखकंदा | सुख के मूल राम | Rama, the source of happiness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 636
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 635, 636
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।