अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सादर कुसल पूछि मुनि ग्यानी। आसन बर बैठारे आनी।।
मूल पाठ
सादर कुसल पूछि मुनि ग्यानी। आसन बर बैठारे आनी।।
पुनि करि बहु प्रकार प्रभु पूजा। मोहि सम भाग्यवंत नहिं दूजा।।
स्रोत अभिलेख 3.12 · पुस्तक पृ. 635, 636
भावार्थ
मूल पाठ के बादज्ञानी मुनिने आदरपूर्वक कुशल पूछकर उनको लाकर श्रेष्ठ आसनपर बैठाया। फिर बहुत प्रकारसे प्रभुकी पूजा करके कहा—मेरे समान भाग्यवान् आज दूसरा कोई नहीं है॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 636 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सादर कुसल पूछि मुनि ग्यानी। आसन बर बैठारे आनी।।
English explanation
The wise sage respectfully asked after their welfare, brought them in, and seated them on fine seats.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| पूछि | पूछकर | having asked |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
| आसन | आसनों पर | on seats |
| बर | उत्तम | fine |
| बैठारे | बैठाया | seated them |
| आनी | लाकर | having brought them |
2 पुनि करि बहु प्रकार प्रभु पूजा। मोहि सम भाग्यवंत नहिं दूजा।।
English explanation
Then, worshipping the Lord in many ways, the sage said, “No one else is as fortunate as I am.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| करि | करके | having performed |
| बहु | अनेक | many |
| प्रकार | प्रकार से | in ways |
| प्रभु | प्रभु की | of the Lord |
| पूजा | पूजा | worship |
| मोहि | मेरे | me |
| सम | समान | equal to |
| भाग्यवंत | भाग्यवान | fortunate |
| नहिं | नहीं है | there is no |
| दूजा | दूसरा | other |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.12
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 636
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 635, 636
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।