अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
किमि सहि जात अनख तोहि पाहीं । प्रिया बेगि प्रगटसि कस नाहीं।।
मूल पाठ
किमि सहि जात अनख तोहि पाहीं । प्रिया बेगि प्रगटसि कस नाहीं।।
एहि बिधि खौजत बिलपत स्वामी। मनहुँ महा बिरही अति कामी।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमसे यह अनख (स्पर्धा) कैसे सही जाती है? हे प्रिये! तुम शीघ्र ही प्रकट क्यों नहीं होती? इस प्रकार [अनन्त ब्रह्माण्डोंके अथवा महामहिमामयी स्वरूपाशक्ति श्रीसीताजीके] स्वामी श्रीरामजी सीताजीको खोजते हुए [इस प्रकार] विलाप करते हैं, मानो कोई महाविरही और अत्यन्त कामी पुरुष हो॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 662 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 किमि सहि जात अनख तोहि पाहीं । प्रिया बेगि प्रगटसि कस नाहीं।।
English explanation
How can you endure this affront? Beloved, why do you not appear at once?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| किमि | कैसे | how |
| सहि | सहा | endured |
| जात | जाता है | can be |
| अनख | अपमान; खीझ का कारण | affront; cause of indignation |
| तोहि | तुम्हारे | you |
| पाहीं | द्वारा; तुमसे | by |
| प्रिया | हे प्रिया | O beloved |
| बेगि | शीघ्र | quickly |
| प्रगटसि | तुम प्रकट होती हो | you appear |
| कस | क्यों | why |
| नाहीं | नहीं | not |
2 एहि बिधि खौजत बिलपत स्वामी। मनहुँ महा बिरही अति कामी।।
English explanation
Thus Lord Rama searched and lamented, as though he were a deeply separated lover filled with intense longing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | manner |
| खौजत | खोजते हुए | searching |
| बिलपत | विलाप करते हुए | lamenting |
| स्वामी | स्वामी राम | Lord Rama |
| मनहुँ | मानो | as though |
| महा | बहुत बड़ा; गहरा | greatly; deeply |
| बिरही | विरह से पीड़ित | suffering separation from the beloved |
| अति | अत्यंत | intensely |
| कामी | प्रेमाकांक्षा से भरा | filled with amorous longing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 662
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
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