अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पूरनकाम राम सुख रासी। मनुज चरित कर अज अबिनासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपूर्णकाम, आनन्दकी राशि, अजन्मा और अविनाशी श्रीरामजी मनुष्योंके-से चरित्र कर रहे हैं। आगे [जानेपर] उन्होंने गृध्रपति जटायुको पड़ा देखा। वह श्रीरामजीके चरणोंका स्मरण कर रहा था, जिनमें [ध्वजा-कुलिश आदिकी] रेखाएँ (चिह्न) हैं॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 662 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
पूरनकाम राम सुख रासी। मनुज चरित कर अज अबिनासी।।
आगे परा गीधपति देखा। सुमिरत राम चरन जिन्ह रेखा।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 पूरनकाम राम सुख रासी। मनुज चरित कर अज अबिनासी।।
English explanation
Rama, whose desires are fulfilled and who is the fullness of bliss, is unborn and imperishable, yet acts in a human manner.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पूरनकाम | जिनकी सभी कामनाएँ पूर्ण हैं | whose desires are all fulfilled |
| राम | राम | Rama |
| सुख | सुख की | of bliss |
| रासी | राशि; भंडार | abundance; treasury |
| मनुज | मनुष्य के समान | human |
| चरित | आचरण; चरित | conduct; deeds |
| कर | करते हैं | performs |
| अज | अजन्मा | unborn |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
2 आगे परा गीधपति देखा। सुमिरत राम चरन जिन्ह रेखा।।
English explanation
Ahead, Rama saw Jatayu, king of vultures, lying there and remembering the markings on Rama’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगे | आगे | ahead |
| परा | पड़ा हुआ | lying fallen |
| गीधपति | गीधराज जटायु को | Jatayu, king of vultures |
| देखा | देखा | saw |
| सुमिरत | स्मरण करते हुए | remembering |
| राम | राम के | Rama’s |
| चरन | चरणों की | of the feet |
| जिन्ह | जो; जिन्होंने | who |
| रेखा | रेखाएँ; चिह्न | lines; markings |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 662
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।