अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
श्रीफल कनक कदलि हरषाहीं। नेकु न संक सकुच मन माहीं।।
मूल पाठ
श्रीफल कनक कदलि हरषाहीं। नेकु न संक सकुच मन माहीं।।
सुनु जानकी तोहि बिनु आजू। हरषे सकल पाइ जनु राजू।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
भावार्थ
मूल पाठ के बादबेल, सुवर्ण और केला हॢषत हो रहे हैं। इनके मनमें जरा भी शङ्का और संकोच नहीं है। हे जानकी! सुनो, तुम्हारे बिना ये सब आज ऐसे हॢषत हैं, मानो राज पा गये हों। (अर्थात् तुम्हारे अंगोंके सामने ये सब तुच्छ, अपमानित और लज्जित थे। आज तुम्हें न देखकर ये अपनी शोभाके अभिमानमें फूल रहे हैं)॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 661 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 श्रीफल कनक कदलि हरषाहीं। नेकु न संक सकुच मन माहीं।।
English explanation
Bel fruits, gold, and banana plants also rejoice at their own praise, with not the slightest doubt or hesitation in their minds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रीफल | बेलफल | bel fruit |
| कनक | सोना | gold |
| कदलि | केले के पौधे | banana plants |
| हरषाहीं | हर्षित होते हैं | rejoice |
| नेकु | तनिक भी | even a little |
| न | नहीं | not |
| संक | शंका | doubt; apprehension |
| सकुच | संकोच | hesitation; embarrassment |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
2 सुनु जानकी तोहि बिनु आजू। हरषे सकल पाइ जनु राजू।।
English explanation
Listen, Janaki: without you today, all these rejoice as though they had gained a kingdom.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| जानकी | हे सीता, जनकपुत्री | O Sita, daughter of Janaka |
| तोहि | तुम्हारे | you |
| बिनु | बिना | without |
| आजू | आज | today |
| हरषे | हर्षित हैं | rejoice |
| सकल | सभी | all |
| पाइ | पाकर | having gained |
| जनु | मानो | as though |
| राजू | राज्य | a kingdom |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 661
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
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