अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऐसेहु पति कर किएँ अपमाना। नारि पाव जमपुर दुख नाना।।
मूल पाठ
ऐसेहु पति कर किएँ अपमाना। नारि पाव जमपुर दुख नाना।।
एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
स्रोत अभिलेख 3.5 · पुस्तक पृ. 625, 627
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसे भी पतिका अपमान करनेसे स्त्री यमपुरमें भाँति-भाँतिके दु:ख पाती है। शरीर, वचन और मनसे पतिके चरणोंमें प्रेम करना स्त्रीके लिये, बस, यह एक ही धर्म है, एक ही व्रत है और एक ही नियम है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 625 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ऐसेहु पति कर किएँ अपमाना। नारि पाव जमपुर दुख नाना।।
English explanation
A woman who insults even such a husband suffers many torments in Yama’s realm.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेहु | ऐसे भी | even such a |
| पति | पति | husband |
| कर | का | of |
| किएँ | करने पर | upon committing |
| अपमाना | अपमान | insult |
| नारि | स्त्री | woman |
| पाव | पाती है | receives; suffers |
| जमपुर | यम के लोक में | in Yama’s realm |
| दुख | कष्ट | sufferings |
| नाना | अनेक प्रकार के | of many kinds |
2 एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
English explanation
There is one duty, vow, and observance: love for the husband’s feet in body, speech, and mind.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकइ | एक ही | only one |
| धर्म | धर्म; कर्तव्य | duty |
| एक | एक | one |
| ब्रत | व्रत | vow |
| नेमा | नियम | observance |
| कायँ | शरीर से | with the body |
| बचन | वचन से | in speech |
| मन | मन से | in mind |
| पति | पति के | the husband’s |
| पद | चरणों में | toward the feet |
| प्रेमा | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.5
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 625
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 625, 627
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।