अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस अभिमान जाइ जनि भोरे। मैं सेवक रघुपति पति मोरे।।
मूल पाठ
अस अभिमान जाइ जनि भोरे। मैं सेवक रघुपति पति मोरे।।
सुनि मुनि बचन राम मन भाए। बहुरि हरषि मुनिबर उर लाए।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा अभिमान भूलकर भी न छूटे कि मैं सेवक हूँ और श्रीरघुनाथजी मेरे स्वामी हैं। मुनिके वचन सुनकर श्रीरामजी मनमें बहुत प्रसन्न हुए। तब उन्होंने हॢषत होकर श्रेष्ठ मुनिको हृदयसे लगा लिया॥ ११॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 635 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस अभिमान जाइ जनि भोरे। मैं सेवक रघुपति पति मोरे।।
English explanation
May this conviction never leave me, even inadvertently: I am the servant, and Rama is my master.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | such |
| अभिमान | आत्मबोध; दृढ़ भाव | conviction of one’s identity |
| जाइ | चला जाए | depart |
| जनि | न | not |
| भोरे | भूल से भी | even inadvertently |
| मैं | मैं | I |
| सेवक | सेवक हूँ | am the servant |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
| पति | स्वामी हैं | are the master |
| मोरे | मेरे | my |
2 सुनि मुनि बचन राम मन भाए। बहुरि हरषि मुनिबर उर लाए।।
English explanation
The sage’s words pleased Rama upon hearing them; rejoicing, he again clasped the noble sage to his chest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि के | the sage’s |
| बचन | वचन | words |
| राम | राम के | Rama’s |
| मन | मन को | heart |
| भाए | प्रिय लगे | pleased |
| बहुरि | फिर | again |
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि को | the noble sage |
| उर | छाती से | to his chest |
| लाए | लगा लिया | clasped |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 635
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।