अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जे जानहिं ते जानहुँ स्वामी। सगुन अगुन उर अंतरजामी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे स्वामी! आपको जो सगुण, निर्गुण और अन्तर्यामी जानते हों, वे जाना करें, मेरे हृदयको तो कोसलपति कमलनयन श्रीरामजी ही अपना घर बनावें॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 634 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जे जानहिं ते जानहुँ स्वामी। सगुन अगुन उर अंतरजामी।।
जो कोसल पति राजिव नयना। करउ सो राम हृदय मम अयना।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जे जानहिं ते जानहुँ स्वामी। सगुन अगुन उर अंतरजामी।।
English explanation
Lord, let those who know your attributed and attributeless nature know it; you know the heart from within.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| ते | वे | they |
| जानहुँ | जानें | let them know |
| स्वामी | हे स्वामी | O Lord |
| सगुन | गुणयुक्त स्वरूप | nature with attributes |
| अगुन | गुणातीत स्वरूप | nature beyond attributes |
| उर | हृदय के | of the heart |
| अंतरजामी | भीतर की बात जानने वाले | knower of what lies within |
2 जो कोसल पति राजिव नयना। करउ सो राम हृदय मम अयना।
English explanation
May that Rama, lord of Kosala and lotus-eyed, make my heart his dwelling.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| कोसल | कोसल देश के | of Kosala |
| पति | स्वामी | lord |
| राजिव | कमल जैसे | lotus-like |
| नयना | नेत्रों वाले | having eyes |
| करउ | बनाएँ | may he make |
| सो | वही | that very |
| राम | श्रीराम | Rama |
| हृदय | हृदय | heart |
| मम | मेरा | my |
| अयना | निवास-स्थान | dwelling |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 634
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।