अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी। सब के हृदयँ निरंतर बासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयद्यपि आप निर्मल, व्यापक, अविनाशी और सबके हृदयमें निरन्तर निवास करनेवाले हैं; तथापि हे खरारि श्रीरामजी! लक्ष्मणजी और सीताजीसहित वनमें विचरनेवाले आप इसी रूपमें मेरे हृदयमें निवास कीजिये॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 634 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी। सब के हृदयँ निरंतर बासी।।
तदपि अनुज श्री सहित खरारी। बसतु मनसि मम काननचारी।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जदपि बिरज ब्यापक अबिनासी। सब के हृदयँ निरंतर बासी।।
English explanation
Although you are pure, all-pervading, and imperishable, dwelling continually in everyone’s heart—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जदपि | यद्यपि | although |
| बिरज | निर्मल; रज से रहित | pure; free of taint |
| ब्यापक | सर्वव्यापी | all-pervading |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| सब | सभी | everyone |
| के | के | of |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| निरंतर | निरंतर | continually |
| बासी | निवास करने वाले | dwelling |
2 तदपि अनुज श्री सहित खरारी। बसतु मनसि मम काननचारी।।
English explanation
Nevertheless, may Rama, enemy of Khara and wanderer of the forest, dwell in my mind with his younger brother Lakshmana and Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तदपि | फिर भी | nevertheless |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| श्री | सीता | Sita |
| सहित | के साथ | with |
| खरारी | खर के शत्रु राम | Rama, enemy of Khara |
| बसतु | निवास करें | may he dwell |
| मनसि | मन में | in the mind |
| मम | मेरे | my |
| काननचारी | वन में विचरने वाले | wanderer of the forest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 634
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।