अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अतुलित भुज प्रताप बल धामः। कलि मल विपुल विभंजन नामः।।
मूल पाठ
अतुलित भुज प्रताप बल धामः। कलि मल विपुल विभंजन नामः।।
धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामः। संतत शं तनोतु मम रामः।।
स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिनकी भुजाओंका प्रताप अतुलनीय है, जो बलके धाम हैं, जिनका नाम कलियुगके बड़े भारी पापोंका नाश करनेवाला है, जो धर्मके कवच (रक्षक) हैं और जिनके गुणसमूह आनन्द देनेवाले हैं, वे श्रीरामजी निरन्तर मेरे कल्याणका विस्तार करें॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 634 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अतुलित भुज प्रताप बल धामः। कलि मल विपुल विभंजन नामः।।
English explanation
You are the abode of incomparable martial prowess and strength; your name destroys the abundant impurity of the age of Kali.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अतुलित | अनुपम | incomparable |
| भुज | भुजाओं का | of the arms |
| प्रताप | पराक्रम | prowess |
| बल | बल का | of strength |
| धामः | धाम | abode |
| कलि | कलियुग के | of the age of Kali |
| मल | मल का | impurity |
| विपुल | बहुत अधिक | abundant |
| विभंजन | पूर्ण नाश करने वाला | destroying |
| नामः | जिनका नाम | whose name |
2 धर्म वर्म नर्मद गुण ग्रामः। संतत शं तनोतु मम रामः।।
English explanation
May Rama, the armor of righteousness and the treasury of joy-giving virtues, continually bestow well-being upon me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म का | of righteousness |
| वर्म | कवच | armor |
| नर्मद | आनंद देने वाले | joy-giving |
| गुण | गुणों के | of virtues |
| ग्रामः | समूह या भंडार | assemblage or treasury |
| संतत | निरंतर | continually |
| शं | कल्याण | well-being |
| तनोतु | प्रदान करें | may he bestow |
| मम | मुझे; मेरे लिए | for me |
| रामः | श्रीराम | Rama |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 634
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।