अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अबिरल भगति बिरति सतसंगा। चरन सरोरुह प्रीति अभंगा।।
मूल पाठ
अबिरल भगति बिरति सतसंगा। चरन सरोरुह प्रीति अभंगा।।
जद्यपि ब्रह्म अखंड अनंता। अनुभव गम्य भजहिं जेहि संता।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे प्रगाढ़ भक्ति, वैराग्य, सत्संग और आपके चरणकमलोंमें अटूट प्रेम प्राप्त हो। यद्यपि आप अखण्ड और अनन्त ब्रह्म हैं, जो अनुभवसे ही जाननेमें आते हैं और जिनका संतजन भजन करते हैं;॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 638 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अबिरल भगति बिरति सतसंगा। चरन सरोरुह प्रीति अभंगा।।
English explanation
Grant me uninterrupted devotion, detachment, the company of saints, and unbroken love for your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अबिरल | निरंतर; अविच्छिन्न | uninterrupted |
| भगति | भक्ति | devotion |
| बिरति | वैराग्य | detachment |
| सतसंगा | संतों का संग | company of saints |
| चरन | चरण | feet |
| सरोरुह | कमल | lotuses |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अभंगा | अटूट | unbroken |
2 जद्यपि ब्रह्म अखंड अनंता। अनुभव गम्य भजहिं जेहि संता।।
English explanation
Although you are the indivisible, infinite Brahman, known through direct experience, whom saints worship—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| ब्रह्म | ब्रह्म; परम सत्य | Brahman; ultimate reality |
| अखंड | अविभाज्य | indivisible |
| अनंता | अनंत | infinite |
| अनुभव | प्रत्यक्ष अनुभूति से | through direct experience |
| गम्य | जाने जा सकने वाले | knowable |
| भजहिं | भजन करते हैं | worship |
| जेहि | जिनका | whom |
| संता | संत | saints |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 638
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।