अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ते तुम्ह सकल लोकपति साईं। पूँछेहु मोहि मनुज की नाईं।।
मूल पाठ
ते तुम्ह सकल लोकपति साईं। पूँछेहु मोहि मनुज की नाईं।।
यह बर मागउँ कृपानिकेता। बसहु हृदयँ श्री अनुज समेता।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन्हीं आपने समस्त लोकपालोंके स्वामी होकर भी मुझसे मनुष्यकी तरह प्रश्र किया। हे कृपाके धाम! मैं तो यह वर माँगता हूँ कि आप श्रीसीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजीसहित मेरे हृदयमें [सदा] निवास कीजिये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 637 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 ते तुम्ह सकल लोकपति साईं। पूँछेहु मोहि मनुज की नाईं।।
English explanation
You are that very sovereign and master of all worlds, yet you ask me as a human would.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वही | that very one |
| तुम्ह | आप | you |
| सकल | सभी | all |
| लोकपति | लोकों के अधिपति | sovereign of the worlds |
| साईं | स्वामी | master |
| पूँछेहु | आपने पूछा | you have asked |
| मोहि | मुझसे | me |
| मनुज | मनुष्य | a human |
| की | की | of |
| नाईं | तरह | in the manner |
2 यह बर मागउँ कृपानिकेता। बसहु हृदयँ श्री अनुज समेता।।
English explanation
O abode of compassion, I ask this boon: dwell in my heart together with Sita and your younger brother Lakshmana.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| बर | वरदान | boon |
| मागउँ | मैं माँगता हूँ | I ask |
| कृपानिकेता | हे कृपा के धाम | O abode of compassion |
| बसहु | बसिए | please dwell |
| हृदयँ | हृदय में | in my heart |
| श्री | सीताजी | Sita |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| समेता | सहित | together with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 637
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।