अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जीव चराचर जंतु समाना। भीतर बसहि न जानहिं आना।।
मूल पाठ
जीव चराचर जंतु समाना। भीतर बसहि न जानहिं आना।।
ते फल भच्छक कठिन कराला। तव भयँ डरत सदा सोउ काला।।
स्रोत अभिलेख 3.13 · पुस्तक पृ. 637, 638
भावार्थ
मूल पाठ के बादचर और अचर जीव [गूलरके फलके भीतर रहनेवाले छोटे-छोटे] जन्तुओंके समान उन [ब्रह्माण्डरूपी फलों] के भीतर बसते हैं और वे [अपने उस छोटे-से जगत्के सिवा] दूसरा कुछ नहीं जानते। उन फलोंका भक्षण करनेवाला कठिन और कराल काल है। वह काल भी सदा आपसे भयभीत रहता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 637 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जीव चराचर जंतु समाना। भीतर बसहि न जानहिं आना।।
English explanation
Moving and unmoving beings are like insects within those fruits; they dwell inside and know nothing beyond them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीव | जीव | living beings |
| चराचर | चलने वाले और स्थिर | moving and unmoving |
| जंतु | कीड़े | insects |
| समाना | के समान | like |
| भीतर | भीतर | inside |
| बसहि | रहते हैं | dwell |
| न | नहीं | not |
| जानहिं | जानते हैं | know |
| आना | अन्य; उससे परे कुछ | anything else; anything beyond |
2 ते फल भच्छक कठिन कराला। तव भयँ डरत सदा सोउ काला।।
English explanation
Even Time, the harsh and terrifying devourer of those fruits, is always afraid of you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | उन | those |
| फल | फलों का | fruits |
| भच्छक | भक्षण करने वाला | devourer |
| कठिन | कठोर; निर्मम | harsh; relentless |
| कराला | भयानक | terrifying |
| तव | आपके | of you |
| भयँ | भय से | in fear |
| डरत | डरता है | is afraid |
| सदा | सदा | always |
| सोउ | वह भी | even that |
| काला | काल; संहारकारी समय | Time, the destroyer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 637
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 637, 638
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।