उत्तरकाण्ड · दोहा 100 (क) · दोहा
भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग।
भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग।
करहिं पाप पावहिं दुख भय रुज सोक बियोग॥ १०० (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.1 · पुस्तक पृ. 1002, 1002
भावार्थ और शब्दार्थ
1भए बरन संकर कलि भिन्नसेतु सब लोग।
एआई-प्रारूप अर्थ: कलियुग में वर्ण मिश्रित हो गए और सभी लोग धर्म-मर्यादा की सीमाएँ तोड़ने वाले हो गए।
English explanation
AI draft meaning: In the Kali age, the social orders became intermixed, and everyone became a transgressor of the bounds of religious and social duty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बरन | वर्ण; सामाजिक वर्ग | social orders or classes |
| संकर | मिश्रित | intermixed |
| कलि | कलियुग में | in the Kali age |
| भिन्नसेतु | धर्म-मर्यादा की सीमाएँ तोड़ने वाले | those who breach the bounds of duty |
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
2 करहिं पाप पावहिं दुख भय रुज सोक बियोग॥ १०० (क)॥
एआई-प्रारूप अर्थ: वे पाप करते हैं और दुःख, भय, रोग, शोक तथा वियोग पाते हैं।
English explanation
AI draft meaning: They commit sins and suffer distress, fear, disease, grief, and separation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करहिं | करते हैं | commit |
| पाप | पाप | sins |
| पावहिं | पाते हैं; भोगते हैं | receive; suffer |
| दुख | दुःख | distress |
| भय | भय | fear |
| रुज | रोग | disease |
| सोक | शोक | grief |
| बियोग | वियोग; बिछोह | separation |
| क | दोहा १०० के पहले भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 100 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 100 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 7.1
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1002, 1002
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।