उत्तरकाण्ड · दोहा 109 (ख) · दोहा
प्रेरित काल बिंधि गिरि जाइ भयउँ मैं ब्याल।
प्रेरित काल बिंधि गिरि जाइ भयउँ मैं ब्याल।
पुनि प्रयास बिनु सो तनु तजेउँ गएँ कछु काल॥ १०९ (ख)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रेरित काल बिंधि गिरि जाइ भयउँ मैं ब्याल।
काल से प्रेरित होकर मैं विंध्य पर्वत पर गया और सर्प हुआ।
English explanation
Impelled by time, I went to Mount Vindhya and became a snake.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेरित | प्रेरित होकर | impelled |
| काल | काल से | by time |
| बिंधि | विंध्य | Vindhya |
| गिरि | पर्वत पर | to the mountain |
| जाइ | जाकर | having gone |
| भयउँ | हुआ | became |
| मैं | मैं | I |
| ब्याल | सर्प | a snake |
2पुनि प्रयास बिनु सो तनु तजेउँ गएँ कछु काल॥ १०९ (ख)॥
फिर कुछ समय बीतने पर मैंने बिना प्रयास के वह शरीर छोड़ दिया।
English explanation
Then, after some time had passed, I left that body without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| प्रयास | प्रयास | effort |
| बिनु | बिना | without |
| सो | वह | that |
| तनु | शरीर | body |
| तजेउँ | मैंने छोड़ दिया | I left behind |
| गएँ | बीतने पर | having elapsed |
| कछु | कुछ | some |
| काल | समय | time |
| ख | दोहा-खंड का संदर्भ-चिह्न ‘ख’ | reference marker for verse section ‘ख’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा 109 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।