उत्तरकाण्ड · दोहा · दोहा
जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान।
मूल पाठ
जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान।
जिमि नूतन पट पहिरइ नर परिहरइ पुरान॥ १०९ ( ग)॥
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे हरिवाहन! मैं जो भी शरीर धारण करता, उसे बिना ही परिश्रम वैसे ही सुखपूर्वक त्याग देता था, जैसे मनुष्य पुराना वस्त्र त्याग देता है और नया पहिन लेता है॥ १०९ (ग)॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1014 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1जोइ तनु धरउँ तजउँ पुनि अनायास हरिजान।
English explanation
O devotee of Hari, whatever body I assumed, I would then leave it effortlessly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोइ | जो भी | whatever |
| तनु | शरीर | body |
| धरउँ | मैं धारण करता | I assumed |
| तजउँ | मैं छोड़ देता | I would leave |
| पुनि | फिर | then |
| अनायास | बिना कठिनाई के | effortlessly |
| हरिजान | हे हरि के भक्त | O devotee of Hari |
2जिमि नूतन पट पहिरइ नर परिहरइ पुरान॥ १०९ ( ग)॥
English explanation
Just as a person puts on a new garment and discards the old one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| नूतन | नया | new |
| पट | वस्त्र | garment |
| पहिरइ | पहनता है | puts on |
| नर | मनुष्य | a person |
| परिहरइ | छोड़ देता है | discards |
| पुरान | पुराना वस्त्र | the old garment |
| ग | दोहा-खंड का संदर्भ-चिह्न ‘ग’ | reference marker for verse section ‘ग’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- दोहा
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1014
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।