उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सनहु असंतन्ह केर सुभाऊ। भूलेहुँ संगति करिअ न काऊ।।
मूल पाठ
सनहु असंतन्ह केर सुभाऊ। भूलेहुँ संगति करिअ न काऊ।।
तिन्ह कर संग सदा दुखदाई। जिमि कलपहि घालइ हरहाई।।
स्रोत अभिलेख 7.39 · पुस्तक पृ. 946, 947
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब असंतों (दुष्टों) का स्वभाव सुनो; कभी भूलकर भी उनकी संगति नहीं करनी चाहिये। उनका संग सदा दु:ख देनेवाला होता है। जैसे हरहाई (बुरी जातिकी) गाय कपिला (सीधी और दुधार) गायको अपने संगसे नष्ट कर डालती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 946 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सनहु असंतन्ह केर सुभाऊ। भूलेहुँ संगति करिअ न काऊ।।
English explanation
AI-generated draft: Hear the nature of wicked people. Never associate with them, even inadvertently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सनहु | सुनो | listen |
| असंतन्ह | दुष्टों का | of wicked people |
| केर | का | of |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
| भूलेहुँ | भूलकर भी | even inadvertently |
| संगति | संगति | association |
| करिअ | करनी चाहिए | should engage in |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी भी | ever |
2 तिन्ह कर संग सदा दुखदाई। जिमि कलपहि घालइ हरहाई।।
English explanation
Their company always brings suffering, just as an unruly cow spoils a herd.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन दुष्टों | those wicked people |
| कर | का | of |
| संग | साथ | company |
| सदा | हमेशा | always |
| दुखदाई | दुख देने वाला | causing suffering |
| जिमि | जैसे | just as |
| कलपहि | गायों के झुंड को | the herd of cows |
| घालइ | बिगाड़ देती है | spoils |
| हरहाई | बिगड़ैल गाय | an unruly cow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 946
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 946, 947
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।