उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा।।
मूल पाठ
गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा।।
देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.63 · पुस्तक पृ. 967, 967
भावार्थ
मूल पाठ के बादगरुडज़ी वहाँ गये जहाँ निर्बाध बुद्धि और पूर्ण भक्तिवाले काकभुशुण्डिजी बसते थे। उस पर्वतको देखकर उनका मन प्रसन्न हो गया और [उसके दर्शनसे ही] सब माया, मोह तथा सोच जाता रहा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 967 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 गयउ गरुड़ जहँ बसइ भुसुंडा। मति अकुंठ हरि भगति अखंडा।।
English explanation
Garuda went where Kakabhushundi lives, whose understanding is unhindered and whose devotion to Hari is unbroken.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गयउ | गए | went |
| गरुड़ | गरुड़, भगवान विष्णु के पक्षीराज वाहन | Garuda, Vishnu’s bird-king mount |
| जहँ | जहाँ | where |
| बसइ | रहते हैं | lives |
| भुसुंडा | काकभुशुंडि, कौए के रूप में रामभक्त कथावाचक | Kakabhushundi, the crow devotee and narrator of Rama’s story |
| मति | बुद्धि | understanding |
| अकुंठ | अवरुद्ध या कुंठित न होने वाली | unhindered; unclouded |
| हरि | भगवान हरि की | of Lord Hari |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अखंडा | अखंड; निरंतर बनी रहने वाली | unbroken; continuous |
2 देखि सैल प्रसन्न मन भयऊ। माया मोह सोच सब गयऊ।।
English explanation
Seeing the mountain, Garuda’s mind became joyful; illusion, delusion, and worry all departed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | on seeing |
| सैल | पर्वत | the mountain |
| प्रसन्न | प्रसन्न | joyful |
| मन | मन | mind |
| भयऊ | हो गया | became |
| माया | माया; भ्रमकारी प्रभाव | illusion; its bewildering influence |
| मोह | मोह; विवेक को ढकने वाला भ्रम | delusion; bewilderment |
| सोच | चिंता | worry |
| सब | सब | all |
| गयऊ | दूर हो गए | departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 967
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 967, 967
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