उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन।।
मूल पाठ
काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन।।
बयरु अकारन सब काहू सों। जो कर हित अनहित ताहू सों।।
स्रोत अभिलेख 7.39 · पुस्तक पृ. 946, 947
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे काम, क्रोध, मद और लोभके परायण तथा निर्दयी, कपटी, कुटिल और पापोंके घर होते हैं। वे बिना ही कारण सब किसीसे वैर किया करते हैं। जो भलाई करता है उसके साथ भी बुराई करते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 947 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काम क्रोध मद लोभ परायन। निर्दय कपटी कुटिल मलायन।।
English explanation
They are given over to lust, anger, arrogance, and greed; they are merciless, deceitful, crooked, and repositories of vice.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामवासना | lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार | arrogance |
| लोभ | लालच | greed |
| परायन | में लगे हुए | given over to |
| निर्दय | दया रहित | merciless |
| कपटी | छल करने वाले | deceitful |
| कुटिल | टेढ़े स्वभाव वाले | crooked in character |
| मलायन | दोषों के घर | repositories of vice |
2 बयरु अकारन सब काहू सों। जो कर हित अनहित ताहू सों।।
English explanation
They bear enmity toward everyone without cause; they harm even those who do them good.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बयरु | बैर | enmity |
| अकारन | बिना कारण | without cause |
| सब | सब | all |
| काहू | किसी से भी | anyone |
| सों | से | with |
| जो | जो व्यक्ति | whoever |
| कर | करता है | does |
| हित | भलाई | good |
| अनहित | बुराई | harm |
| ताहू | उसके भी | even that person |
| सों | साथ | toward |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.39
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 947
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 946, 947
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