उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि कर होइ परम कल्याना। सोइ करहु अब कृपानिधाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे कृपानिधान! अब वही कीजिये, जिससे इसका परम कल्याण हो। दूसरेके हितसे सनी हुई ब्राह्मणकी वाणी सुनकर फिर आकाशवाणी हुई—'एवमस्तु (ऐसा ही हो)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1013 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि कर होइ परम कल्याना। सोइ करहु अब कृपानिधाना।।
बिप्रगिरा सुनि परहित सानी। एवमस्तु इति भइ नभबानी।।
स्रोत अभिलेख 7.109 · पुस्तक पृ. 1013, 1014
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 एहि कर होइ परम कल्याना। सोइ करहु अब कृपानिधाना।।
English explanation
AI draft: O treasury of compassion, now do whatever will bring him the highest welfare.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इसका | of this person |
| कर | का | of |
| होइ | हो | may come about |
| परम | सर्वोच्च | highest |
| कल्याना | कल्याण | welfare |
| सोइ | वही | that very thing |
| करहु | कीजिए | please do |
| अब | अब | now |
| कृपानिधाना | हे कृपा के भंडार | O treasury of compassion |
2 बिप्रगिरा सुनि परहित सानी। एवमस्तु इति भइ नभबानी।।
English explanation
Hearing the Brahmin’s words steeped in concern for others, a heavenly voice declared, “So be it.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्रगिरा | ब्राह्मण की वाणी | the Brahmin’s words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| परहित | दूसरों का हित | others’ welfare |
| सानी | सनी हुई | imbued with |
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| इति | ऐसा कहती | thus saying |
| भइ | हुई | arose |
| नभबानी | आकाशवाणी | a heavenly voice |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.109
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1013
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1013, 1014
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।