सुन्दरकाण्ड · दोहा 55 · दोहा/सोरठा
-सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम।
-सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम।
रावन काल कोटि कहु जीति सकहिं संग्राम।।55।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.55 · पुस्तक पृ. 763, 764
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1-सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम।
सभी वानर और भालू स्वभाव से वीर हैं; फिर उनके सिर पर प्रभु राम का संरक्षण भी है।
English explanation
All the monkeys and bears are naturally brave; moreover, Lord Rama stands over them as their protector.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| सूर | वीर | brave |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| सब | सभी | all |
| पुनि | फिर भी, इसके अतिरिक्त | moreover |
| सिर | सिर | their heads |
| पर | पर | over |
| प्रभु | स्वामी | Lord |
| राम | श्रीराम | Rama |
2 रावन काल कोटि कहु जीति सकहिं संग्राम।।55।।
हे रावण, कहो—वे युद्ध में करोड़ों कालों को भी जीत सकते हैं।
English explanation
O Ravana, tell me— they could defeat even millions of embodiments of Death in battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रावन | हे रावण | O Ravana |
| काल | मृत्यु के अधिपति काल को | Death personified |
| कोटि | करोड़ों | millions of |
| कहु | कहो | tell me |
| जीति | जीत | defeat |
| सकहिं | सकते हैं | can |
| संग्राम | युद्ध में | in battle |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 55
- स्रोत अभिलेख
- 5.55
- सहायक विषय
- दूतका रावणको समझाना और लक्ष्मणजीका पत्र देना
- मुद्रित पृष्ठ
- 763, 764
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।